N /n/ और M /m/ दोनों एक ही तरह से बनते हैं: मुँह में हवा रुकती है, घोषत्व (voicing) चालू रहता है, और एक नासिक्य गूँज नाक से निकलती है। लेकिन हवा रुकने की जगह दोनों में अलग होती है। /n/ के लिए, जीभ का अगला भाग आपके ऊपर के दाँतों के पीछे के उभार (दंतमूल) पर दबाव डालता है, और होंठ आराम की स्थिति में रहते हैं। /m/ के लिए, दोनों होंठ आपस में जुड़ जाते हैं और जीभ रास्ते से हट जाती है। तेज़ या ढीली बातचीत में, ख़ासकर शब्दों के जोड़ पर (green market), अमेरिकी अक्सर इन्हें मिला देते हैं। स्पैनिश या मैंडरिन (जिसमें शब्द के अंत में /m/ नहीं होता) जैसी भाषाओं के ESL बोलने वाले अक्सर उसे चुन लेते हैं जो बोलने में आसान लगे। हालाँकि, दोनों के बीच देखने में बहुत बड़ा अंतर है, इसलिए आईने के सामने अभ्यास करने से यह भ्रम जल्दी दूर हो जाता है।
दोनों आवाज़ों में फ़र्क़ कहाँ है।
5 छोटे-छोटे मुँह के बदलाव। इनमें से कोई एक भी ग़लत हुआ, और आवाज़ बग़ल वाली आवाज़ में फिसल जाती है।
अब आपकी बारी।
"Sun" और "Sum" को कुछ बार record करके सुनें — इस फ़र्क़ को पकड़ने में आपका अपना कान ही सबसे अच्छा feedback है।
सिर्फ़ एक आवाज़ का फ़र्क़।
नीचे का हर pair सिर्फ़ एक आवाज़ से अलग है: /n/ को /m/ में बदलें, और मतलब भी बदल जाता है। पूरे breakdown के लिए किसी भी शब्द पर tap करें।
अगर आप इन्हें सुनकर अलग नहीं कर पाते, तो वजह यह है।
/n/ और /m/ दोनों घोष नासिक्य (voiced nasals) हैं, दोनों में हवा नाक से बाहर आती है, vocal cords कंपन करते हैं, और मुँह में हवा रुकती है। एकमात्र अंतर यह है कि हवा कहाँ रुकती है: /m/ के लिए होंठों पर, और /n/ के लिए दंतमूल (ridge) पर जीभ लगाकर। ज़्यादातर भाषाएँ इनमें साफ़ अंतर करती हैं, इसलिए यह भ्रम आमतौर पर मातृभाषा के प्रभाव के कारण नहीं होता। यह अक्सर तेज़ और अस्पष्ट (mumbled) बातचीत की वजह से होता है, जहाँ मुँह किसी एक उच्चारण के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होता। मैंडरिन में syllable के अंत में /m/ नहीं होता, इसलिए मैंडरिन बोलने वाले अंग्रेज़ी शब्दों के अंत में अक्सर /n/ बोल देते हैं। सबसे बड़ी दिक़्क़त शब्दों के जोड़ पर (word boundaries) होती है: यदि आपकी जीभ /n/ के लिए दंतमूल तक जाने में आलस करती है, तो can make जैसे phrases cam make की तरह सुनाई दे सकते हैं।
पहले मुँह की muscles, फिर कान।
4 छोटे drills। इन्हें ज़ोर से बोलकर करें: सुनने से पहले मुँह के अंदर फ़र्क़ महसूस करें।
आईने में चेक करें: nine कहें। आपके होंठ किसी भी समय एक-दूसरे को नहीं छूने चाहिए, दोनों /n/ दंतमूल पर जीभ लगाकर बनते हैं। अब mine कहें, इसके शुरू में आपके होंठ मज़बूती से बंद होने चाहिए। अगर आपको कोई साफ़ अंतर नहीं दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि आप मुँह को सही आकार नहीं दे रहे हैं।
हर व्यंजन (consonant) को थोड़ा खींचें: nnnn को तीन सेकंड तक बोलें, होंठ खुले रखें और जीभ दंतमूल पर रखें। अब तीन सेकंड के लिए mmmm पर जाएँ, होंठ पूरी तरह बंद रखें। महसूस करें कि गूँज कहाँ हो रही है — मुँह के अगले हिस्से में या होंठों पर। दोनों का एहसास बिलकुल अलग होना चाहिए।
Minimal pairs को धीरे-धीरे पढ़ें: nice/mice, net/met, knee/me, night/might, name/maim. एक से दूसरे शब्द पर जाते समय आईने में अपने होंठों को देखें।
शब्दों के जोड़ पर (word boundaries) ध्यान दें: can make, green market, down memory lane. यह पक्का करें कि /m/ के लिए होंठ बंद होने से पहले आपकी जीभ /n/ के लिए दंतमूल (ridge) तक ज़रूर पहुँचे। वर्त्स्य (alveolar) संपर्क में आलस करना ही इस भ्रम का सबसे आम कारण है।