Think /θ/ और this /ð/ बिल्कुल एक ही तरह से बोले जाते हैं। जीभ की नोक ऊपर और नीचे के सामने वाले दाँतों के बीच या ठीक पीछे हल्के से रखी जाती है, और साँस इसके आस-पास से नरमी से बहती है। बस एक ही फ़र्क है: घोषत्व (voicing)। /θ/ अघोष (voiceless) है (इसमें सिर्फ़ हवा होती है, कोई कंपन नहीं)। /ð/ घोष (voiced) है (vocal cords काँपते हैं और गले में साफ़ कंपन महसूस होता है)। बस इतना ही। मुँह का आकार, जीभ की जगह और हवा का बहाव बिल्कुल एक जैसा रहता है। इकलौता बदलाव यह है कि आपके vocal cords कंपन कर रहे हैं या नहीं। फ्रेंच, जर्मन, रशियन और जापानी बोलने वाले अक्सर इनकी जगह /s/ और /z/ (या /t/ और /d/) बोल देते हैं क्योंकि उनकी भाषाओं में दोनों में से कोई भी TH आवाज़ नहीं है। (वहीं हिंदी बोलने वाले अक्सर इनकी जगह दंत्य थ /tʰ/ और ध /dʱ/ का इस्तेमाल करते हैं, जो स्पर्श व्यंजन या stops हैं)। इसे ठीक करने का तरीक़ा आपकी आदत पर निर्भर करता है: अगर आप S या Z बोलते हैं, तो अपनी जीभ की नोक को आगे लाकर दाँतों से छुआएँ। अगर आप T, D (या थ/ध) बोलते हैं, तो शायद आपकी जीभ पहले से ही दाँतों पर है—बस उसे इतना ज़ोर से दबाना बंद करें और हवा को बिना रोके लगातार बहने दें।
दोनों आवाज़ों में फ़र्क़ कहाँ है।
5 छोटे-छोटे मुँह के बदलाव। इनमें से कोई एक भी ग़लत हुआ, और आवाज़ बग़ल वाली आवाज़ में फिसल जाती है।
अब आपकी बारी।
"Think" और "This" को कुछ बार record करके सुनें — इस फ़र्क़ को पकड़ने में आपका अपना कान ही सबसे अच्छा feedback है।
सिर्फ़ एक आवाज़ का फ़र्क़।
नीचे का हर pair सिर्फ़ एक आवाज़ से अलग है: /θ/ को /ð/ में बदलें, और मतलब भी बदल जाता है। पूरे breakdown के लिए किसी भी शब्द पर tap करें।
अगर आप इन्हें सुनकर अलग नहीं कर पाते, तो वजह यह है।
इन दोनों आवाज़ों में confusion इसलिए नहीं होता कि इन्हें एक-दूसरे से अलग पहचानना मुश्किल है (अगर आप गले पर उँगलियाँ रखें तो घोषत्व या voicing का फ़र्क बहुत साफ़ पता चलता है), बल्कि इसलिए होता है क्योंकि ज़्यादातर भाषाओं में ये दोनों ही आवाज़ें नहीं होतीं। कई भाषाओं में TH की ये दोनों आवाज़ें ग़ायब हैं, इसलिए सीखने वाले अक्सर इनकी जगह /s/, /z/, /t/, /d/, /f/ या /v/ बोल देते हैं। नतीजा: think बन जाता है sink, tink या fink; और this बन जाता है dis, zis या vis। स्पैनिश (Spanish) इसका कुछ हद तक अपवाद है, क्योंकि इसके लगभग सभी डायलेक्ट्स दो स्वरों के बीच एक हल्की [ð] आवाज़ का इस्तेमाल करते हैं (जैसे nada का 'd'), लेकिन स्पैनिश बोलने वालों को भी शब्दों की शुरुआत में TH बोलने और लैटिन अमेरिकी (Latin American) इलाक़ों में /θ/ बोलने में दिक़्क़त होती है। /θ/ और /ð/ के बीच आपस में confusion असल में बहुत कम होता है। जब कोई सीखने वाला इन दोनों में से एक आवाज़ निकालना सीख लेता है, तो दूसरी आवाज़ के लिए उसे बस अपना घोषत्व (voicing) चालू या बंद करना होता है। असली मुश्किल तो TH की आवाज़ निकालने में है: जीभ को इतना आगे लाना कि वह दाँतों को छुए, और उसे इतना रिलैक्स (relax) रखना कि हवा बिना रुके नरमी से बह सके।
पहले मुँह की muscles, फिर कान।
4 छोटे drills। इन्हें ज़ोर से बोलकर करें: सुनने से पहले मुँह के अंदर फ़र्क़ महसूस करें।
Voicing को चालू-बंद करना: thigh /θaɪ/ बोलें, यह अघोष (voiceless) है। अब thy /ðaɪ/ बोलें, यह घोष (voiced) है। अपने गले पर उँगलियाँ रखें और इन दोनों के बीच स्विच करें। Thigh, thy, thigh, thy। आपको कंपन चालू और बंद होते हुए महसूस होना चाहिए। मुँह का आकार बिल्कुल एक जैसा रहता है, सिर्फ़ vocal cords बदलते हैं।
शीशे में चेक करें: this बोलें। जीभ की नोक आपके दाँतों के बीच से हल्की सी झाँकनी चाहिए। अगर आपको अपनी जीभ बिल्कुल नहीं दिख रही है, तो इसका मतलब है कि आपने इसे दाँतों के पीछे खींच लिया है और आप /ð/ की जगह /z/ या /d/ बोल रहे हैं।
ऐसे जोड़ों की practice करें जिनमें सिर्फ़ घोषत्व (voicing) बदलता है: thigh / thy, ether / either, teeth / teethe, loath / loathe। इन दोनों के बीच मुँह बिल्कुल नहीं हिलता, सिर्फ़ गले का कंपन चालू या बंद होता है।
Function-word के पैटर्न पर ध्यान दें: /ð/ से शुरू होने वाले शब्द (the, this, that, they, them, those, there, then, though) लगभग सभी ग्रामर (grammar) के शब्द होते हैं। /θ/ से शुरू होने वाले शब्द (think, three, thanks, throw, throat, thirsty) लगभग सभी content शब्द होते हैं। जब आपको सही आवाज़ का अंदाज़ा न हो, तो यह नियम बहुत काम आता है।